Tuesday, November 9, 2010

यदि परमात्मा पर विश्वास हो तो सभी कुछ कितना सरल हो जाता हैं यह तो एक आस्तिक ही बता सकता हैं, जीवन में कोई शंका शेष नहीं रह जाती, आस्तिक का योगक्षेम वहन स्वयं ईश्वर ही करते हैं, भक्त की हर व्यथा उसकी अपनी न रह कर समाप्त हो जाती हैं। ईश्वर से प्रेम हो जाने पर स्वतः ही सारी दुनिया आपको अपनी सी लगने लगती हैं और सच ही तो हैं इस सम्पूर्ण विश्व का रचयिता परमात्मा ही तो आपके सबसे अपने हैं, उनके सिवा कोई भी नहीं जो सर्वदा आपके साथ हैं।

Monday, November 8, 2010

आपको जब कभी ऐसा लगे कि आपको किसी ने आवाज़ दी हैं परन्तु यह पता न चले कि किसने पुकारा हैं तो निश्चित रूप से समझ लीजिए कि यह अपनी ही अंतरात्मा की पुकार है जो मनुष्य को सचेत कर रही हैं कि यह बहूमूल्य जीवन धीरे-धीरे हाथ से निकलता जा रहा हैं और यदि ऐसा ही चलता रहा तो परमपिता का यह अमूल्य अनुदान व्यर्थ न चला जाए।

Friday, November 5, 2010

By the grace of God we have Festivals to celebrate which gives us utmost faith that God is present everywhere and anywhere. So do all your karmas which put you to the right path of spirituality and do not hurt others as all the festivals give only one message that Goodness prevails. So be the true child of God and be good to others.

Thursday, November 4, 2010

जीवन के अच्छे कर्म ही मनुष्य को देवता बना देते हैं,अपने समर्थ के अनुसार सबकी सहायता करने की कोशिश करें,चाहे वह सहायता किसी एक व्यक्ति तक ही सीमित क्यों न हो, क्योंकि हर एक मनुष्य उस विराट जगत विधाता का अंश ही तो हैं, इसलिए जो सेवा आप किसी के लिए करते हैं वह परमात्मा तक ही पहुँचती हैं।सबकी सेवा करें यही परमार्थ हैं।

Wednesday, November 3, 2010

Have you ever felt all alone in this big wide world?
Have you ever felt there is nobody to help you throughout the way?
Have you ever felt that smile dosen't reach your face often no matter how festive it is?
Have you ever felt that there is no shoulder upon which you may cry?

If Yes

Then Surrender Yourself to the Almighty and you'll never feel alone in this world,and all your worries are His but mind you "Prayer is not a spare Wheel that you pull out when in trouble but It is the steering wheel that guides you to the right direction throughout."

Tuesday, November 2, 2010

यह जीवन यदि व्यर्थ चला गया तो फिर पीछे पछताने के अलावा कोई चारा न रह जाएगा क्योंकि एक बार हाथ से निकल गया तो न जाने फिर कितनी योनियाँ भुगतने के बाद ही यह बहूमूल्य मानव जीवन प्राप्त होगा इसीलिए समय रहते ही सचेत हो जाने में समझदारी हैं, देर करने से नुकसान केवल हमारा हैं। अपने इस बेशकीमती जीवन को अर्थपूर्ण बनाएँ, मानवता की सेवा करें।

Monday, November 1, 2010

भगवान ने यह अमूल्य मानव जीवन इसीलिए प्रदान किया हैं कि इसको वाकई अमूल्य बनाया जाए, व्यर्थ की बातों में समय न गवाँ कर हमेशा इस तरह अपना समय व्यवस्थित करें कि प्रभु नाम के साथ-साथ दूसरों का भला करने का भी पूरा मौका मिल सके और मानव जीवन जो बहुत मुश्किलों के बाद हमें मिला हैं वो कहीं व्यर्थ न चला जाए और परमपिता की ओर हमारा कर्तव्य कहीं अधूरा न रह जाए।