Tuesday, November 30, 2010
कुछ लोग जीवन में सदा रोते ही रहते हैं या भगवान को दोष देते रहते हैं कि भगवान ने उन्हें यह नहीं दिया, वह नहीं दिया, परन्तु इस दोषारोपण से पहले वह भूल जाते हैं कि परमपिता ने सभी को समान सामर्थ और समान इन्द्रियाँ दी हैं, शरीर के सभी अंग जो ईश्वर ने हमें दिए हैं वह अमूल्य हैं और सबसे बड़ी शक्ति जो परमात्मा ने हमें दी हैं वह हैं प्रार्थना करने की अमूल्य निधि जिसकी तुलना सारे जग की सम्पति से भी नहीं की जा सकती। मन को ईश्वर प्रेम और भक्ति में लगाए रखना ही मानव की अतुलनीय संपदा हैं।
Monday, November 29, 2010
Wednesday, November 24, 2010
Tuesday, November 23, 2010
मनुष्य के जीवन पर सर्वप्रथम अधिकार ईश्वर का होता है, दिव्तिय उस मातृभूमि का जिसमें मनुष्य ने जन्म लिया, तीसरा माता-पिता का जिनकी वजह से यह संसार दिखा और अंतिम स्वयं मनुष्य का खुद पर।
जिस परमपिता ने जीवन जैसा अमूल्य उपहार प्रदान किया वह हर क्षण वंदनीय हैं।
मातृभूमि जिसमें हमारे पोषण के लिए अन्न उपजा उसका उपकार हम कभी नहीं उतार सकते।
माता-पिता जो कुछ भी संतान के लिए करते हैं वह अतुलनीय हैं, उसकी एकमात्र तुलना हैं ईश्वर प्रेम, जिस प्रकार ईश्वर कोई भेदभाव नहीं करते और अपनी सभी संतानो से समभाव से प्रेम करते है, उसी प्रकार माता-पिता अपना दुलार हम पर लुटाते हैं।
अंतिम हक मनुष्य का स्वयं के जीवन पर हैं।
जिस परमपिता ने जीवन जैसा अमूल्य उपहार प्रदान किया वह हर क्षण वंदनीय हैं।
मातृभूमि जिसमें हमारे पोषण के लिए अन्न उपजा उसका उपकार हम कभी नहीं उतार सकते।
माता-पिता जो कुछ भी संतान के लिए करते हैं वह अतुलनीय हैं, उसकी एकमात्र तुलना हैं ईश्वर प्रेम, जिस प्रकार ईश्वर कोई भेदभाव नहीं करते और अपनी सभी संतानो से समभाव से प्रेम करते है, उसी प्रकार माता-पिता अपना दुलार हम पर लुटाते हैं।
अंतिम हक मनुष्य का स्वयं के जीवन पर हैं।
Monday, November 22, 2010
Friday, November 19, 2010
भगवान हर जगह जगह हैं परन्तु वह हमें दिखाई नहीं देते, हर कण में व्याप्त हैं परन्तु उनके होने का अहसास हम इस बात से लगा सकते हैं कि हर घर में ईश्वर ने अपने प्रतिनिधि माता-पिता हर किसी को दिए हैं, बहुत खुशकिस्मत हैं वो बच्चे जिन्हें उनके माता-पिता का प्रेम और दुलार मिला हैं, दुनिया का हर रिश्ता इस प्रेम के आगे फीका हैं क्योंकि जिस तरह माता-पिता हमसे अनन्त प्रेम करते हैं परमपिता भी अपनी हर कृति से स्नेह रखते हैं और अपनी हर संतान की कामना पूरी करते हैं बशर्ते उस मनुष्य ने अपनी कामना के अनुसार कर्म किए हैं।
किसी ने सच ही कहा है कि भगवान होते हुए भी हमसे अनभिज्ञ हैं और पृथ्वी पर माता-पिता ही उस विधाता की पहचान हैं।" हे परमात्मा मैं आपको आपकी सर्वोतम कृति माता-पिता को रचने के लिए शत्-शत् प्रणाम एवं धन्यवाद करती हूँ।"
किसी ने सच ही कहा है कि भगवान होते हुए भी हमसे अनभिज्ञ हैं और पृथ्वी पर माता-पिता ही उस विधाता की पहचान हैं।" हे परमात्मा मैं आपको आपकी सर्वोतम कृति माता-पिता को रचने के लिए शत्-शत् प्रणाम एवं धन्यवाद करती हूँ।"
Thursday, November 18, 2010
जीवन लम्बा नहीं ईश्वर प्रेम से ओत-प्रोत होना चाहिए, जो तभी संभव हैं जब मनुष्य धरती की हरेक वस्तु में केवल परमानन्द को ही देखें, क्योंकि हर जगह सृष्टि के कण-कण में परमपिता का ही रूप ही तो व्याप्त हैं, सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी, आकाश, वन-उद्यान, पशु-पक्षी सभी कुछ प्रभु ने ही तो रचा हैं और ईश्वर की महानतम रचना हैं मानव जिसको भगवान ने विवेक दिया हैं, मानव शरीर और बुद्धि को इतना प्रखर बनाया हैं कि खुद मनुष्य भी यदि चाहे तो देवता बन सकता हैं।
Wednesday, November 17, 2010
अंधकार विशाल होता हैं,वह शक्तिवान एवं भयावह होता हैं, यह तो नींद को धन्यवाद हैं कि वह हमें विस्मृति में धकेल देती है, नहीं तो रात की यह अवधि पर्वत के समान भारी लगे। परंतु इस विशालमय रात को एक नन्हा सा दीपक चुनौती दे यह कहता हैं कि दिन का उजाला अब ज्यादा दूर नहीं। इसी प्रकार मनुष्य जीवन अंधकारमय और भयावह चुनौतियों से भरपूर हैं और ईश्वर में आस्था वह नन्हा दीपक जो हमें संदेश देता हैं कि उज्ज्वल सुनहरी सुबह नज़दीक ही हैं।
Tuesday, November 16, 2010
भगवान को पाना हैं तो निरंतर प्रयास करना होगा, मन को इस तरह से सिखाना होगा कि भगवान का ध्यान छोड़ मन कहीं और न रमे क्योंकि जिस संसार में हम रहते हैं और उसको सच समझ लेते हैं वह तो ईश्वर की रची माया के अलावा कुछ भी नहीं, इस दुनिया में परमपिता से ज्यादा कोई हमारा सगा नहीं, यह बात हम जिस दिन महसूस करने लगेगें उसी क्षण हमारे सर्वत्र कष्ट मिट जाएँगे और अपना जीवन हमें वरदान स्वरूप लगने लगेगा।
Monday, November 15, 2010
जीवन की शुरूआत रोते हुए भले हो पर जीवन का अंत हमेशा हँसते हुए करें,क्योंकि हम जब दुनिया में आते हैं तो नादान छोटे बच्चे होतें हैं परन्तु दुनिया से जाते हैं परिपक्व एवं समझदार हो कर, जीवन के सभी अनुभव लेकर, ईश्वर की अराधना हमें न सिर्फ महामानव बल्कि देवत्व तक ले जाती हैं और हर मानव के जीवन का यही तो गहन मर्म हैं।
Friday, November 12, 2010
Thursday, November 11, 2010
Wednesday, November 10, 2010
जिदंगी और मौत दोनो परमात्मा के हाथ हैं,न जाने कब जीवन की डोर खिंच जाए इसीलिए जो अनमोल जीवन परमपिता का महान अनुदान हैं उसका एक भी क्षण व्यर्थ न गवाएँ, हर पल यह ही चेष्टा करें कि आप समाज के प्रति कुछ योगदान अवश्य करें। चाहे वह गरीब अनाथ की सेवा हो या भूखे को अन्नदान,जितना हो सके अपने स्तर पर ज़रूर करें।
Tuesday, November 9, 2010
यदि परमात्मा पर विश्वास हो तो सभी कुछ कितना सरल हो जाता हैं यह तो एक आस्तिक ही बता सकता हैं, जीवन में कोई शंका शेष नहीं रह जाती, आस्तिक का योगक्षेम वहन स्वयं ईश्वर ही करते हैं, भक्त की हर व्यथा उसकी अपनी न रह कर समाप्त हो जाती हैं। ईश्वर से प्रेम हो जाने पर स्वतः ही सारी दुनिया आपको अपनी सी लगने लगती हैं और सच ही तो हैं इस सम्पूर्ण विश्व का रचयिता परमात्मा ही तो आपके सबसे अपने हैं, उनके सिवा कोई भी नहीं जो सर्वदा आपके साथ हैं।
Monday, November 8, 2010
आपको जब कभी ऐसा लगे कि आपको किसी ने आवाज़ दी हैं परन्तु यह पता न चले कि किसने पुकारा हैं तो निश्चित रूप से समझ लीजिए कि यह अपनी ही अंतरात्मा की पुकार है जो मनुष्य को सचेत कर रही हैं कि यह बहूमूल्य जीवन धीरे-धीरे हाथ से निकलता जा रहा हैं और यदि ऐसा ही चलता रहा तो परमपिता का यह अमूल्य अनुदान व्यर्थ न चला जाए।
Friday, November 5, 2010
By the grace of God we have Festivals to celebrate which gives us utmost faith that God is present everywhere and anywhere. So do all your karmas which put you to the right path of spirituality and do not hurt others as all the festivals give only one message that Goodness prevails. So be the true child of God and be good to others.
Thursday, November 4, 2010
जीवन के अच्छे कर्म ही मनुष्य को देवता बना देते हैं,अपने समर्थ के अनुसार सबकी सहायता करने की कोशिश करें,चाहे वह सहायता किसी एक व्यक्ति तक ही सीमित क्यों न हो, क्योंकि हर एक मनुष्य उस विराट जगत विधाता का अंश ही तो हैं, इसलिए जो सेवा आप किसी के लिए करते हैं वह परमात्मा तक ही पहुँचती हैं।सबकी सेवा करें यही परमार्थ हैं।
Wednesday, November 3, 2010
Have you ever felt all alone in this big wide world?
Have you ever felt there is nobody to help you throughout the way?
Have you ever felt that smile dosen't reach your face often no matter how festive it is?
Have you ever felt that there is no shoulder upon which you may cry?
If Yes
Then Surrender Yourself to the Almighty and you'll never feel alone in this world,and all your worries are His but mind you "Prayer is not a spare Wheel that you pull out when in trouble but It is the steering wheel that guides you to the right direction throughout."
Have you ever felt there is nobody to help you throughout the way?
Have you ever felt that smile dosen't reach your face often no matter how festive it is?
Have you ever felt that there is no shoulder upon which you may cry?
If Yes
Then Surrender Yourself to the Almighty and you'll never feel alone in this world,and all your worries are His but mind you "Prayer is not a spare Wheel that you pull out when in trouble but It is the steering wheel that guides you to the right direction throughout."
Tuesday, November 2, 2010
यह जीवन यदि व्यर्थ चला गया तो फिर पीछे पछताने के अलावा कोई चारा न रह जाएगा क्योंकि एक बार हाथ से निकल गया तो न जाने फिर कितनी योनियाँ भुगतने के बाद ही यह बहूमूल्य मानव जीवन प्राप्त होगा इसीलिए समय रहते ही सचेत हो जाने में समझदारी हैं, देर करने से नुकसान केवल हमारा हैं। अपने इस बेशकीमती जीवन को अर्थपूर्ण बनाएँ, मानवता की सेवा करें।
Monday, November 1, 2010
भगवान ने यह अमूल्य मानव जीवन इसीलिए प्रदान किया हैं कि इसको वाकई अमूल्य बनाया जाए, व्यर्थ की बातों में समय न गवाँ कर हमेशा इस तरह अपना समय व्यवस्थित करें कि प्रभु नाम के साथ-साथ दूसरों का भला करने का भी पूरा मौका मिल सके और मानव जीवन जो बहुत मुश्किलों के बाद हमें मिला हैं वो कहीं व्यर्थ न चला जाए और परमपिता की ओर हमारा कर्तव्य कहीं अधूरा न रह जाए।
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