Monday, April 12, 2010

पुरूषः स परः पार्थ भक्तया लभ्यस्त्वनन्यया।
यस्यान्तः स्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम्‌॥
अर्थात उस परमपुरूष (परमात्मा) की प्राप्ति, जिसके भीतर सारे प्राणी स्थित हैं और जिससे सब कुछ व्याप्त हैं, अनन्य्भक्ति द्वारा ही संभव हैं।

Friday, April 9, 2010

अकसर कहा जाता हैं कि दिल से दिल को राहत होती हैं यानि यदि हम किसी को दिल से याद करते हैं तो करोड़ो मील दूर बैठे व्यक्ति के पास हमारे दिल का संदेश पहुँच जाता हैं, ऐसा विज्ञान ने प्रमाणित किया हैं, उसी प्रकार यदि हम परमात्मा को एक बार स्मरण करते हैं तो वे हमें करोड़ बार बुलाते हैं।

Wednesday, April 7, 2010

ज्ञान एवं ध्यान का चोली दामन का साथ हैं। ध्यान से ही ज्ञान की प्राप्ति होती हैं। ध्यान द्वारा अर्जित संतुलित मनःस्थिति से मनुष्य यदि चाहे तो अपने लिए मोक्ष का द्वार भी खोल सकता हैं।

Tuesday, April 6, 2010

इंसान का सूक्ष्म शरीर उतनी ही बड़ी सच्चाई हैं जितना की परमात्मा की सत्ता, इसी सूक्ष्म शरीर के संचित कर्मो एवं उनके फलानुसार ही ईश्वर हमारा पुर्नजन्म निर्धारित करते हैं।

Monday, April 5, 2010

ईश्वर के दर्शन के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं हैं, परमात्मा को अपने भीतर ही देखना चाहिए जिसके लिए ज़रूरी हैं कि हम अपने भीतर संयम, सद्‌विचार एवं सद्‌भावना का विकास करें, दरसल परिष्कृत आत्मा ही परमात्मा की उपलब्धि हैं।

Friday, April 2, 2010

झूठ नहीं बोलना चाहिए,परन्तु कड़वा एवं अप्रिय सच भी किसी को नहीं बोलना चाहिए। दूसरों को नुकसान न पहुँचे, किसी की भावना को ठेस न पहुँचे ऐसी बात बोलनी चाहिए,ऐसी बोली गई बात झूठ होकर भी सौ सच के बराबर हैं।उसी प्रकार जिस बात से किसी को पीड़ा पहुँचे, किसी का मन आहत हो ऐसी कही गई बात सच होकर भी झूठ के बराबर ही हैं।

Thursday, April 1, 2010

गायत्री महामंत्र की उपासना सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वोपरि ही नहीं यह मनुष्य जीवन को बहिरंग एवं अंतरंग दोनो ही नज़रिए से समृध्द और उन्नत बनाने का राजमार्ग हैं।