Thursday, December 9, 2010
यदि मनुष्य स्वयं को सुधारना चाहे तो लोक से लेकर परलोक तक सुधार का मौका होता हैं पर जरूरत है पहल करने की, यदि मनुष्य एक कदम ईश्वर की ओर बढाता है तो ईश्वर हज़ारो हाथो से उसका स्वागत करते हैं। यह बात हमें सर्वदा स्मरण रहनी चाहिए कि आध्यात्म का लक्ष्य केवल आत्मकल्याण एवं मोक्ष प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि स्वयं सत्मार्ग पर चल औरों को भी प्रेरित करना हैं।
Wednesday, December 8, 2010
बच्चे अपने माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ सकते हैं परन्तु माँ-बाप ऐसा कभी नहीं कर सकते, उन्हें तो हर हाल में अपने बच्चों की ही चिन्ता सताती हैं। बच्चे स्वार्थी हो अपनी अलग दुनिया बसा सकते हैं पर माता-पिता के लिए तो उनकी दुनिया उनके बच्चे ही होते हैं। इसी तरह हम सभी परमपिता की संतान हैं और ईश्वर हमें सदैव स्मरण रखते हैं।
Tuesday, December 7, 2010
Monday, December 6, 2010
जीवन में कितनी ही असफलताएँ क्यों न आएँ परन्तु एक न एक मार्ग ऐसा अवश्य होता है जहाँ रोशनी की नन्हीं किरण टिमटिमाती रहती हैं और वह रास्ता हैं प्रभु में आस्था का परन्तु इसका भावार्थ यह नहीं कि जब जीवन में मुश्किल आए तभी ईश्वर को याद करें यहाँ कबीर का दोहा बहुत ही सटीक हैं कि दुख में सिमरन सब करे सुख में करे न कोई, जो सुख में सिमरन करे तो दुख काए को होए॥
Friday, December 3, 2010
Thursday, December 2, 2010
पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते, नदियाँ एवं जलाश्य अपना पानी स्वयं नहीं पीते, सूर्य-चन्द्रमा अपने प्रकाश और शीतलता से औरों को सनिग्ध करते हैं उसी प्रकार मनुष्य का जन्म भी इस धरती पर परोपकार के लिए हुआ है। भगवान जब मनुष्य के कर्मो का लेखा-जोखा करता हैं तब इसी बात का आकलन किया जाता हैं कि मनुष्य ने अपने जीवन का कितना भाग परोपकार में बिताया हैं, यदि मनुष्य ने सौ झूठ बोलकर भी किसी की भलाई की हो तो वह परमपिता के अनुसार क्षमाशील हैं। जितना संभव हो अपना जीवन परोपकार में लगाएँ क्योंकि अपने लिए तो पशु भी जीते है, इंसान वही हैं जो औरों के लिए जिए।
Wednesday, December 1, 2010
प्रभु नाम एक अनुपम निधि हैं, जो कि खर्चने से और बढ़ती है, खर्चने का मतलब इससे हैं कि हम जितना ही प्रभु नाम लेगें और उसका प्रचार करेंगे वो चौगुना होकर हमें प्राप्त होगा और जीवन के सबसे बड़े सत्य से हमें अवगत करवा देगा कि ईश्वर ही हमारे सबसे बड़े सम्बन्धी हैं और अंनत तक केवल उनके ही साथ हमारा सम्बन्ध बना रहेगा बाकी सभी दुनियावी रिश्ते इसी दुनिया में समाप्त हो जाएँगे।
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