Sunday, March 7, 2010

जिस प्रकार माता-पिता सदा पुत्र का इंतजार करते है उसी प्रकार परम पिता परमेश्वर सदा प्रतीक्षा करते हैं कि कब हम उनके समीप आए तो ताकि वह करूणा एवं प्रेम की वर्षा हम पर कर सकें तथा हमारा योगक्षेम वहन कर सकें अर्थात हमारा उद्धार कर सकें।

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