Friday, April 15, 2011

यह जीवन आपादाओं और विपत्तियों से भरा है और बिना प्रभु कृपा से इस भवसागर से पार पाना नामुमकिन है, जीवन की किसी भी परिस्थिति में हम हार सकते हैं और जीत भी सकते है यदि हम प्रभू से शक्ति लें कार्य करें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं और परमपिता का अंश होने के कारण ऐसा कुछ भी नहीं जो हमारे सामर्थ में न हो, हमारी आत्मा का सामर्थ हमारी सोच से कई गुणा बड़ा है और उसकी शक्ति का पार पाना नामुमकिन।

1 comment:

  1. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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