Saturday, December 12, 2009

हमारी संस्कृति में मृत्यु को एक महापर्व माना जाता है एवं उसे सुखद बनाने की प्रेरणा दी जाती है। ॠषि-मुनियों का कथन है- मरने से डरना कैसा? मृत्यु तो अटल सत्य है,मृत्यु को सदा याद रखें एवं सहर्ष उसका आलिंगन करें।

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