Thursday, July 22, 2010

"जीवतं सफलं तस्य, य़ः परार्थोद्यतः सदा" अर्थात जीवन उसी का सफल और सार्थक हैं जो सदा परोपकार में संल्गन रहता हैं, परोपकारी को किसी चीज़ का भय नहीं रहता न पाप का और न ही पतन का, उसे तो केवल लोक-परलोक दोनो में ही जयजयकार ही मिलती हैं एवं परोपकारी व्यक्ति सदा ही पूज्यनीय हैं।

2 comments:

  1. Hi Didi, Today first time i read so many things from geeta....but i like the way u have simplified the meanings of the same....because as a layman its very hard to understand the simple things and fact in our life....
    nice blog, nice thoughts, good work...keep it up....

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